शाद उदयपुरी, Shayar Shaad Udaipuri

शायर शाद उदयपुरी

शाद उदयपुरी जी उदयपुर, राजस्थान के रहने वाले बेहद लोकप्रिय युवा कवि, शायर एवं गजलकार हैं, उनकी कशिश भरी आवाज़ सीधे दिल में उतर जाती है। उनकी ग़ज़लें एवं कविताएँ श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। वे अनेक सामाजिक एवं साहित्यिक संस्थाओं से जुड़े हुए हैं और समाज के कल्याण एवं उत्थान के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।

नाम: मोहम्मद अकबर

साहित्यिक नाम: शाद उदयपुरी

जन्म तिथि: 2 जुलाई 1980

जन्म स्थान: वाराणसी, उत्तर प्रदेश

व्यवसाय: व्यापार (निदेशक, एलीट इन्फार्मेटिक्स)

राष्ट्रीयता: भारतीय

शिक्षा: बी टेक (कंप्यूटर साइंस), एमबीए (प्रेस्टन यूनिवर्सिटी, USA), पीजीडीबीएम (आईटी)

विधा: गज़ल, नज़्म, गीत

पता: 88 बी ब्लॉक श्याम नगर, भुवाणा, उदयपुर 313001, राजस्थान

दूरभाष: 9351307172

ईमेल: akbar.mohammad@gmail.com

ब्लॉग: https://shayarakbarkhan.blogspot.com

‘शाद’ जी की रचनाओं को पढ़ने के लिए यहाँ फॉलो करें –

Nasir Banarasi
शाद उदयपुरी जी को मेरी शुभकामनाएँ। आप ऐसे ही आगे बढ़ते रहें और लोगों में खुशियां बाँटते रहें।

ग़म को दूर भगाओ तो कोई बात बने
यही ऐतबार अपने दिल का राज़ बने

नसीर बनारसी

शाद उदयपुरी जी की प्रमुख रचनाएँ

तुम लाख दूर जाओ

तुम लाख दूर जाओ मगर कुछ भी नहीं होना हम दोनो साथ रहने की ख़ातिर हुए हैं...

तूने बचपन जो छीना मैं रोया नही

तूने बचपन जो छीना मैं रोया नही बेवजह मुस्कुराऊँ, ये होता नही खो गया नूर...

लड़ा के हिंदू और मुस्लिम ये गद्दी चाहते हो क्यूँ

चमन में आग तुम लगाते हो क्यूँ वतन का नाम तुम मिटाते हो क्यूँ देश के चंद...

भूलकर हर अलम

भूलकर हर अलम अब ख़ुशी चाहिये बस ख़ुशी से भरी ज़िन्दगी चाहिये भूल बैठा हूँ आलम...

शाद उदयपुरी जी की रचनाएँ

शाद जी के बेहतरीन ग़ज़लों, गीतों, नज़्मों व कविताओं का संग्रह जहाँ आप उनके ख्यालों को शब्दों की जुबानी पढ़ सके हैं।

Kamlesh Sharma
शाद साहब की ग़ज़ल प्रस्तुति बेहद उच्च दर्जे की है और वे महफिलों में समां बाँध देते हैं। श्रोताओं के दिलों को जीतना उन्हें बखूबी आता है। वो एक जिंदादिल और नेक इंसान हैं।
कमलेश शर्मा

काव्य मंचों पर प्रस्तुति देते हुए

Children Welfare Society for Under Privileged Children

लोकप्रिय रचनाएँ

बाप बूढ़ा रक़म को भटकता रहा

वो ग़रीबी से हर रोज़ मरता रहा सर नगीने जड़ा ताज सजता रहा राजनीति का स्तर है...

दिल में तेरे समा सकूँ

दिल में तेरे समा सकूँ वो एहसास बनना चाहती हूँ होठों को तेरे सजा सकूँ वो...

कवि सम्मलेन व्यवस्थापक

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